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ईद के बहाने

कई  सालों से ईद की छुट्टी के एक दिन पहले मेरा मामूल हो गया  है अपने विद्यार्थिओं  से ईद के बारे में बात करना। अफ़सोस होता है कि वे इस त्यौहार के मिठास से महरूम हैं.   दरअसल  मेरे विद्यार्थियों की भाँति, हममे से कई  लोगों के लिए कुछ त्यौहार सिर्फ कैलेंडर पर दिन मात्र है  […]

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अर्थ का अवधान दे

मन के भवन में तम सघन नवज्योति का संधान दे i हे शारदे!  तू शक्ति दे, संकल्प दे, शुभ ज्ञान दे II     अज्ञान के उत्ताप से अस्तित्व अब निष्प्राण है I सब राग हैं रूठे हुए स्वरहीन अब हर गान हैI हे अम्ब ! तू अवलंब है, नव चेतना , नव प्राण दे […]

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शरद की चाँदनी

दूध मे धोई हुई सी, यह शरद की चाँदनी है . खुद मे हीं खोई हुई सी, यह शरद की चाँदनी है   हृदय मे नव- भाव उठते, राग उठते, ताल उठते , मधुर छंदों  की परी सी, यह शरद की चाँदनी है   ग्रंथि- बंधन  नष्ट कर, सब दायरों को लाँघ, आओ आ, कि […]

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दीप जी लें !!

किरणवीणा सप्त स्वर पर, नृत्यरत हैं भुवन अंबर. कल अनिश्चित मीत मेरे, आज इस क्षण ज्योति पी लेंI   मन-तटों पर सेतुबंधन, शुष्क भू पर अमिय वर्षण, यही है कर्तव्य अपना, प्रेम बाँटें घृणा पी लेंI   चहु दिशा मे अंध गह्वर, मार्ग दुष्कर गमन दुर्भर, दीप-उर्जा हृदय मे भर पार कर लें पथ कंटीलेI […]

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ये कौन सा दयार है

कुछ समय से दिल-ओ-दिमाग़ पर एक अजीब सा अहसास तारी है-इस अहसास का नाम क्या है कह नहीं सकता. शायद डर, बेबसी, गुस्सा, हताशा,शर्म और पीड़ा का मिला जुला रूप. देश मे इन दिनो जो चल रहा है उससे लगता नहीं की मैं भारत देश का नागरिक हूँ. वही भारत जिसको कवि दिनकर ने अपनी […]

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Confused? Great!!

“My child has a problem. Till last month, she wanted to be a pilot, from the last week she has been saying Architecture would be a better option for her and after attending a lecture delivered by the top lawyer of the city yesterday, lawyer is all that she wants to become!! She is really […]

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कुछ दृश्य

दृश्य 1 एक नन्ही सी चिड़िया तीर सी उड़ी- और चीर गई आसमान का सीना – मानो ईश्वर ने,  झुक कर किए हों हस्ताक्षर – नीले काग़ज़ पर! दृश्य  2 नदी के उपर झुका एक पेड़ हवा के हरेक झोंके के साथ कुछ और करीब हो जाता है नदी के. मानो कुछ कह रहा हो […]

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इब्तिदा

कुछ कहना, जिन्दा रहने जैसा है I जिन्दा हूँ, तो लिहाजा कुछ कह ही रहा हूँगा I कुछ-कुछ तो कहता ही  रहा हूँ , कुछ-कुछ लोगों से I पर सब से  कहना हो तो लिखना पड़ता है I और लिखना, बकौल Kedar Nath Singh, दिखना है, जिस से मैं परहेज  करता हूँ I लिहाजा मुश्किल […]