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वैलेंटाइन डे के बहाने

  अभी मैंने किसी फिल्म में नायिका को नायक से कहते  सुना: I think I like you. No I guess,  I love you.  बाला कुछ  महसूस   तो कर रही पर क्या  है ये अहसास , इसे कोई नाम देने में दिक्कत महसूस कर  रही है.  कुछ तो हुआ है, कुछ हो गया है. ये  पसंद […]

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कहाँ हो कुसुमाकर?

  धरती के पास थी जितनी भी कवितायेँ एक साथ आ गई याद उसे वसंत आ गया   धरती ने लिखे थे जितने भी प्रेमपत्र आकाश को उन सब को एक साथ बैठ गया पढ़ने आकाश वसंत आ गया   धरती ने सिखाये थे जितने भी गीत हवाओं को हवाएँ उन्हें एक स्वर में गुनगुनाने […]

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अर्थ का अवधान दे

मन के भवन में तम सघन नवज्योति का संधान दे i हे शारदे!  तू शक्ति दे, संकल्प दे, शुभ ज्ञान दे II     अज्ञान के उत्ताप से अस्तित्व अब निष्प्राण है I सब राग हैं रूठे हुए स्वरहीन अब हर गान हैI हे अम्ब ! तू अवलंब है, नव चेतना , नव प्राण दे […]

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शरद की चाँदनी

दूध मे धोई हुई सी, यह शरद की चाँदनी है . खुद मे हीं खोई हुई सी, यह शरद की चाँदनी है   हृदय मे नव- भाव उठते, राग उठते, ताल उठते , मधुर छंदों  की परी सी, यह शरद की चाँदनी है   ग्रंथि- बंधन  नष्ट कर, सब दायरों को लाँघ, आओ आ, कि […]

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कुछ दृश्य

दृश्य 1 एक नन्ही सी चिड़िया तीर सी उड़ी- और चीर गई आसमान का सीना – मानो ईश्वर ने,  झुक कर किए हों हस्ताक्षर – नीले काग़ज़ पर! दृश्य  2 नदी के उपर झुका एक पेड़ हवा के हरेक झोंके के साथ कुछ और करीब हो जाता है नदी के. मानो कुछ कह रहा हो […]

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सुबह काफ़ी थी …

विहान,भोर, उषा, सुबह, प्रभात, मॉर्निंग –  चाहे कुछ भी  कहें, एक ताज़गी, एक नयेपन, एक शान्ति की अनुभूति होती है। ऐसा  लगता है जैसे धरती ने अपनी काली केंचुली उतार फेंकी हो, आँखें मल कर अंगड़ाई  ली हो  किसी ने, जैसे फीनिक्स राख  हो कर पुनर्जीवित हुआ हो, जैसे कोई उम्मीद उतरी हो आसमान से […]