बंधु इस नए साल में !!

काल के विशाल वट वृक्ष से एक सूखा पत्ता बस अब किसी भी पल गिरने ही वाला है.  वर्षांत समीप है या यूँ कहें कि नवागन्तुक के स्वागतार्थ वंदनवार सज चुके है. नव वर्ष के आगमन की उद्घोषणा करती तूर्यध्वनि बस श्रवणेंद्रियों पर दस्तक देनी ही वाली है. ऐसी बेला में यह स्वाभाविक है कि मनोमस्तिष्क पुनरीक्षण एवं मूल्यांकन की मुद्रा धारण कर ले.  लेकिन मैं नहीं चाहता हूँ कि सद्यासन्न उत्सव के वातावरण में मैं आनन्दबाधा, जिसे अंग्रेजी में spoil sport कहते हों, बनूँ.. आज मुझे नव वर्ष से जुडी कई कविताएं याद आ रही हैं. तो क्यों न आज उन कविताओं को आप से भी साझा करूं. चिंतन-मूल्यांकन की सहज प्रवृत्ति पर  अंकुश लगाना उतना सहज नहीं है. अतः यह संभव है क़ि कविताओं में मेरी विचार सरणी भी प्रतिबिंबित हो जाए, इसके लिए अग्रिम क्षमा-याचना !!

नव वर्ष से संबद्ध मेरी प्रिय  कविताओं में प्रथम स्थान पर है अमृता प्रीतम की लिखी कविता-“नया साल कुछ ऐसे आया”.  प्रस्तुत है उनकी पंजाबी कविता का हिंदी अनुवाद:

जैसे सोच की कंघी से एक दन्दा टूट गया

जैसे समझ के कुर्ते का एक चिथड़ा उड़ गया

जैसे आस्था के आँखों में  एक तिनका चुभ गया

नींद ने जैसे अपने हाथों में सपने का जलता कोयला पकड़ लिया

नया साल कुछ ऐसे आया

 

जैसे दिल के फिकरे से एक अक्षर बुझ गया

जैसे विश्वास के कागज़ पर सियाही गिर गई

जैसे समय के होठों से एक गहरी सांस निकल गई

और आदमजात की आँखों में जैसे एक आंसू भर आया

नया साल कुछ ऐसे आया 

जैसे इश्क़ की जबान पर एक छाला उठ आया’

सभ्यता की बाँहों में से एक चूड़ी टूट गई

इतिहास के अंगूठी में से एक नीलम गिर गया

और जैसे धरती ने आसमान का एक बड़ा उदास-सा खत पढ़ा

‘‘धरती ने आसमान का एक बड़ा उदास-सा खत पढ़ा”! आह! सच में, २०१५ में ऐसी कई घटनाएँ घटीं जिन्हे याद करके लगता है की ये साल ‘अपने हाथों में सपने का जलता कोयला पकड़ने” जैसा था , जिसे हम जल्दी से जल्दी अपने हाथों से गिरा कर मुक्त होना चाहेंगे. अटल जी ने भी कुछ ऐैसे ही भावों को शब्द दिए हैं अपनी कविता ‘एक बरस बीत गया’ में:

एक बरस बीत गया 


झुलसाता जेठ मास
शरद चाँदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया


एक बरस बीत गया

 

सींकचों में सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अंबर तक
गूँज मुक्ति गीत गया


एक बरस बीत गया

 

 

यह तो बात हुई २०१५ की. अब बारी है २०१६ के लिए शुभेच्छाओं की. शुभकामना क्या करें, इसके लिए आप कवि से कुछ राय लेना चाहते हैं तो  थोड़ा सब्र रखें. पहले  ये तो तय करें की शुभकामनाएं देनी किस किसको है. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने हमारा काम सरल कर दिया है:

नए साल की शुभकामनाएँ

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएँ

जाते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएँ

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएँ

वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएँ

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएँ

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएँ

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएँ

 और अब  बारी है. शुभकामनाओं की.  इसके लिए मैं  मगध क्षेत्र के अद्भुत कवि नचिकेता की कविता प्रस्तुत करता हूँ:

मौसम हो अनुकूल
बंधु इस नए साल में

फूलों की
खुशबू से भाती हो पुरवाई
ऊसर खेतों में भी ले
फ़सलें अंगड़ाई
चहके हर बनफूल
बंधु इस नए साल में

होंठ-होंठ पर
राग-रंग की मुसकानें हों
उलझे नहीं समस्या के
ताने-बाने हों
दुख: जाए पथ भूल
बंधु इस नए साल में

हर चूल्हा में
आग छान पर वरद धुआँ हो
लहालोट उम्मीदों संग
गुनगुनी हवा हो
श्रम को गड़े न शूल
बंधु इस नए साल में

हर घर के
खूँटे से बँधे दुधारू गाएँ
बच्चों की किलकारी सुन
पुलकित हो माँएँ
रोपें नहीं बबूल
बंधु इस नए साल में

सपने में
आनेवाले कल की आँखों में
हो उड़ान की भाषा चाहत की
पांखों मे
हो दुर्दिन का ठूल
बंधु इस नए साल में

हाँ!हाँ!, मुझे पता है कि अब आपको नए वर्ष के लिए केक लेने जाने वाले है.  मैं अब विलम्ब का कारण नहीं बनाना चाहूंगा.  अंत में , २१ वर्ष पहले लिखी गई शुभकामनाएं आप सब को सादर सप्रेम समर्पित:

विगत वर्ष

कैसा भी हो,

अब बीत चुका।

पर क्या अपना

स्नेह-सिंधु भी

रीत चुका ?

मन की मीलित

कलियाँ खोलें

सूखे मुख पर

चन्दन रोलें

जो भी हो

जैसा भी हो

अद्वैत भाव का

मधु घोलें

थोड़ा हंस लें

थोड़ा रो लें

थोड़ा सुन के

पूरा गुन लें

चुप चुप न रहें

कुछ तो बोलें

हम वह हो लें

जो कि ‘हम’ हैं!!!

 

आमीन!!

One thought on “बंधु इस नए साल में !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *